मुजफ्फरनगर:फर्जी आईडी से लोन पर निकालीं लग्जरी गाड़ियां
दरअसल मुजफ्फरनगर से बेहद चौका देने वाला मामला सामने आया है जहां एक गिरोह ने नकली दस्तावेज बनाकर लोन पर लगती गाड़ियां निकाली गाड़ियों की कीमत लगभग 70 लाख रुपए है पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया
मुजफ्फरनगर: गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर से पेन कार्ड और फर्जी आधार कार्ड व अन्य कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर 1.19 लाख लाख रुपये का क्रेडिट कार्ड और 17 लाख 50 हजार रुपये का ऑटो लोन पास कराने वाले गैंग के चार सदस्यों को पुलिस ने दबोच लिया। दरअसल आरोपियों के कब्जे से चार लग्जरी गाड़ी बरामद हुई हैं। वही बरामद गाड़ियां लगभग छह महीने पहले ही कंपनी से निकाली गई हैं, सभी गाड़ियों की कीमत लगभग 70 लाख रुपये है।
एएसपी संजीव विश्नोई और एसपी सिटी अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि गांधी कॉलोनी निवासी संदीप कुमार ने पुलिस से शिकायत की थी कि उसके कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर किसी व्यक्ति ने फर्जी तरीके से लोन करा लिया है। मामले का पता चलते ही पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू की।
मंगलवार को आरोपी शहर के रामपुरी निवासी अंकुश त्यागी, एकता विहार निवासी आलोक त्यागी, नई मंडी निवासी संदीप कुमार और गांधीनगर निवासी सुधीर कुमार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से चार लग्जरी गाड़ी बरामद हुई हैं। बरामद गाड़ियां लगभग छह महीने पहले ही कंपनी से निकाली गई हैं, जिनकी कीमत लगभग 70 लाख रुपयें है। बता दे की आरोपियों ने वादी के दस्तावेजों पर फोटो बदलकर उसे धुंधला किया था। पुलिस बैंककर्मियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच में भी जुटी हुई है।
इस तरह खुला फर्जी लोन का खेल:
दरअसल गांधी कॉलोनी निवासी संदीप कुमार पुत्र ब्रजपाल सिंह डोने-पत्ते तैयार करने का काम करता है। वह करीब 15 दिन पहले यूनियन बैंक से लोन लेने पहुंचा था तो उसे पता चला कि उसके नाम से क्रेडिट कार्ड और ऑटो लोन लिया गया है। पीड़ित सीधे लोन देने वाले एक्सिस बैंक की कोर्ट रोड स्थित शाखा पहुंचा दस्तावेज चेक किए गए तो फोटो दूसरे मिले और दस्तावेज वादी के पीड़ित ने पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने छानबीन की तो चार अन्य लोगों के दस्तावेजों के साथ भी छेड़छाड़ कर ऑटो लोन का खेल खुल गया।
गैंग अब तक खरीद चुका 15 गाड़ियां:
मामले के बारे में एसपी सिटी ने बताया कि यह गैंग फर्जी पैन कार्ड, आधार कार्ड,व फर्जी फोटो बनाकर बैंक में कागज जमा कर लोन पास कराकर नई गाड़ी कंपनी से खरीद लेते है। उनके मुताबिक यह लोग अब तक करीब 15 गाड़ियों का फर्जी फाइनेंस करा चुका है। एक गाड़ी को खरीदने के लिये गाड़ी की कीमत का 20 प्रतिशत बैंक में जमा कराते है, जिसमे फर्जी पता होने के कारण बैंक उसे ट्रेस नही कर पाता है। एसपी सिटी ने बताया कि इस गैंग में एक फाइनेंसर होता है और साथ में दो तीन लोग फर्जी कागज तैयार करने का काम करते हैं और फर्जी फोटो देते हैं।
लोन दिलाने के नाम पर लेते थे दस्तावेज:
मामले के बारे में इंस्पेक्टर नई मंडी पंकज पंत ने बताया कि यह गैंग लोगों से बैंक से लोन दिलाने के नाम पर दस्तावेज ले लेता है। इसके बाद पहचान पत्रों में छेड़छाड़ की जाती है। बैंककर्मियों की मिलीभगत से लोन पास कराया जाता है। लोन से लिए गए वाहन को बेचकर हिस्सा बांट लेते हैं। वादी के अलावा अन्य पीड़ितों से भी लोन दिलाने के नाम पर दस्तावेज लिए गए थे।
बैंक कर्मियों से मिलीभगत की जांच:
एसपी सिटी का अनुमान है कि इस गैंग की बैंक कर्मियों से मिलीभगत हो सकती है। यह लोग खरीदी हुई गाड़ी को गाड़ियां खरीदने-बेचने का काम करने वाले डीलरों को पूरे रेट में बेच देते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस गैंग में गाड़ी बेचने पर आए हुए रुपयों को अपना एक हिस्सा होता है जिसके बाद यह आपस में रुपये बेचने के बाद बांट लेते हैं।