जब सेना का जवान शहीद होता है, तब काफी दुख होता है, लेकिन किसी परिवार के लिए 16 साल तक इंतजार करना काफी पीड़ादायक है। यूपी में मुरादनगर के हिसाली गांव में रहने वाले जवान अमरीश त्यागी का शव 16 साल बाद बर्फ में दबा मिला।दरअसल, स्वर्ण विजय वर्ष के अवसर पर भारतीय सेना (Indian Army) के 25 सदस्यों का एक दल 12 सितंबर को उत्तरकाशी से सतोपंथ शिखर पर विजय प्राप्त करने के लिए निकला था। यह चोटी हिमालय पर्वतमाला के मध्य में है। यह गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Gangotri National Park) की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है। इसकी ऊंचाई करीब 7075 मीटर है। ऑपरेशन के दौरान सेना की टीम को 23 सितंबर को हर्षिल नाम की जगह के पास बर्फ में दबा अमरीश त्यागी का शव मिला था. सेना के जवान इसे गंगोत्री ले गए और पुलिस को सौंप दिया। वह 23 अक्टूबर, 2005 में सियाचीन से लौटते समय उत्तराखंड के हरशील की खाई में गिर गए थे। उनके साथ शहीद हुए 3 जवानों के शव तो मिल गए, लेकिन उनकी कोई जानकारी नहीं मिली थी। 2 दिन पहले बर्फ पिघलने से एक शव दिखा। कपड़े और कुछ पेपरों के आधार पर शव की पहचान अमरीश के रूप में हुई।अमरीश के परिवार वालों ने आज तक उनके जिंदा होने की आस नहीं छोड़ी थी, उन्हें विश्वास था कि अमरीश अपनी जान बचाकर कहीं उधर-इधर रह रहा है। 24 सितंबर को देर शाम दिल्ली सेना मुख्यालय से 3 अधिकारी आए और उन्होंने अमरीश के पार्थिव शरीर के उत्तराखंड में मिलने की सूचना दी। सूचना मिलते ही परिवार में एक बार फिर पहाड़ टूट गया। आपको बता दें कि अमरीश त्यागी वर्ष 1995-96 में मेरठ में सेना में भर्ती हुए थे। कई जगह तबादले के बाद 1999 में करगिल युद्ध के दौरान उनकी तैनाती लेह लद्दाख में हुई थी। अमरीश का हवाई जहाज से सबसे ज्यादा ऊंचाई से कूदने के मामले में देशभर में नाम था।