आखिर आजादी के कितने साल बाद सिक्किम भारत का हिस्सा बना
कितना जानते हैं आप अपने देश के राज्य सिक्किम के बारे में आइए पढ़ते हैं सिक्किम का इतिहास सिक्किम एक बेहद खूबसूरत राज्य है जो भारत के नार्थ ईस्ट में स्थित है जिसकी सीमा उत्तर की तरफ चीन से पूरब की तरफ भूटान और पश्चिम की तरफ नेपाल से जुड़ी हुई है।
सिक्किम एक बेहद कम जनसंख्या वाला और भारत का दूसरा सबसे छोटा प्रदेश है जिसकी राजधानी गंगतोक है सिक्किम में मात्र 4 जिले हैं। सिक्किम राज्य की स्थापना 17वीं शताब्दी में नामग्याल ( Namgyal dynasty ) राजशाही परिवार ने की थी जिसको बुद्ध पुजारी चोग्याल (chogyal) चलाते थे। 1890 में सिक्किम को अंग्रेजी हुकूमत ने एक ब्रिटिश रियासत (princely state) का दर्जा दिया 1947 में आजादी के समय सिक्किम भारत का हिस्सा तो बना लेकिन उसे एक विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था।
राजशाही सत्ता के दौरान कुछ सिक्किम के लोग लोकतंत्र चाहते थे और उन्होंने अपनी एक पार्टी का गठन किया जिसका नाम रखा गया सिक्किम स्टेट कांग्रेस (Sikkim State Congress) सिक्किम स्टेट कांग्रेस के लोग सिक्किम का भारत में विलय चाहते थे। परंतु वहां के राज्य शाही परिवार यह मंजूर नहीं करता था इसी के चलते सिक्किम स्टेट कांग्रेस ने एक प्रस्ताव राजशाही परिवार के पास भेजा जिसमें उन्होंने भारत से विलय का आग्रह किया परंतु राजशाही परिवार ने इससे इनकार किया उन्होंने तीन सचिवों (secretaries) की नियुक्ति की जो की सिक्किम स्टेट कांग्रेस के लोग हो। और एक विरोधी मुहिम (counter movement) चलाई जिसका नाम रखा गया सिक्किम नेशनल पार्टी जो सिक्किम का भारत में विलय का विरोध करती थी।
इसके विरोध में सिक्किम स्टेट कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया (civil disobedience movement) चलाएं और भारत से सहयोग मांगा जिसकी प्रतिक्रिया में भारत ने एक छोटी मिलिट्री पुलिस फोर्स मुहैया कराई इसके चलते 1950 में समझौता हुआ और सिक्किम को एक विशेष राज्य का दर्जा मिला इस समझौते के अंतर्गत भारत सिक्किम के विदेशी मामले, रक्षा, कूटनीति(diplomacy) और संचार संभालता था और सिक्किम अन्य प्रशासनिक विषयो को संभालता था।
1975 में सिक्किम के प्रधानमंत्री ने भारतीय संसद में अपील की की सिक्किम को भारत के एक संपूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। सिक्किम भारत के उन चुनिंदा राज्यों मैं आता है जिनमें साक्षरता दर और प्रति व्यक्ति आय काफी अच्छी है इसलिए सिक्किम के लोगों का रहन सहन काफी उत्तम होता है परंतु इस सब के बावजूद 1973 में सिक्किम के लोग अपनी जीने के तौर तरीकों से खुश नहीं थे उन्हें राजशाही सत्ता रास नहीं आ रही थी इसलिए सिक्किम में राजशाही परिवार के खिलाफ विद्रोह हो गया यह 2 साल तक चला 1975 में अप्रैल माह में इंडियन आर्मी ने गंगतोक शहर पर अपना अधिकार जमाया और चोग्याल महल के सुरक्षाकर्मियों से आत्मसमर्पण कराया और सिक्किम को एक भारत का 22 वा राज्य घोषित किया और वहां की राजशाही परिवार को हटाकर वहां पर लोकतंत्र स्थापित किया