AK-47 और ग्रेनेड दिखाकर युवाओं को उकसाने वाली साजिश का खुलासा, यूपी को अस्थिर करने की कोशिश नाकाम
उत्तर प्रदेश में पाकिस्तान समर्थित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ है। विदेशी हैंडलर्स सोशल मीडिया के जरिए AK-47 और ग्रेनेड दिखाकर युवाओं को भड़का रहे थे और रेलवे स्टेशन समेत संवेदनशील जगहों पर हमलों की प्लानिंग कर रहे थे। ATS ने कई गिरफ्तारियां की हैं, जांच जारी।
उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस और एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की जांच में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का आतंकी नेटवर्क सामने आया है, जो पाकिस्तान, सऊदी अरब और साउथ अफ्रीका से संचालित हो रहा था। इस नेटवर्क के सदस्य युवाओं को सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए AK-47 राइफल तथा ग्रेनेड दिखाकर उकसा रहे थे और उन्हें देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश कर रहे थे।
जांच के अनुसार, मास्टरमाइंड विदेश में बैठे हैंडलर्स युवाओं को रिक्रूट करने के लिए हथियारों की तस्वीरें और वीडियो शेयर करते थे। उनका मकसद उत्तर प्रदेश में अशांति फैलाना और महत्वपूर्ण स्थानों जैसे रेलवे स्टेशन पर हमले करवाना था। लखनऊ रेलवे स्टेशन को निशाना बनाने की भी प्लानिंग सामने आई है।
कैसे चला नेटवर्क? इस मॉड्यूल में शामिल आरोपी इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हुए युवाओं से संपर्क करते थे। कुछ आरोपी विदेश में रह रहे हैं, जिनमें साउथ अफ्रीका में सैलून चलाने वाला एक व्यक्ति और दुबई स्थित संदिग्ध शामिल हैं। ये लोग पाकिस्तान के हैंडलर्स से सीधे जुड़े हुए थे और उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों (जैसे बिजनौर, मेरठ आदि) के युवाओं को टारगेट कर रहे थे।
पिछले साल नवंबर में एक वायरल वीडियो में AK-47 और ग्रेनेड दिखाने का मामला भी इसी नेटवर्क से जुड़ा पाया गया। शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने इसे खिलौना बताकर केस बंद कर दिया था, लेकिन ATS की जांच में हथियार असली होने और पाकिस्तानी लिंक का खुलासा हुआ। इस लापरवाही पर दो अधिकारियों को सस्पेंड भी किया गया।
गिरफ्तारियां और आगे की कार्रवाई ATS और STF की संयुक्त टीम ने लखनऊ और बिजनौर से कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में पाकिस्तान स्थित हैंडलर ‘अबू बकर’ समेत अन्य विदेशी कनेक्शन सामने आए हैं। पुलिस अब इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का अलर्ट यह खुलासा देश में सोशल मीडिया के जरिए हो रही रेडिकलाइजेशन की बढ़ती समस्या को फिर उजागर करता है। यूपी ATS युवाओं को ऐसे लिंक्स से सावधान रहने की अपील कर रही है। कोई भी संदिग्ध गतिविधि देखने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या ATS को सूचित करें।
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की सतर्कता को दर्शाती है। जांच अभी जारी है और पूरे नेटवर्क को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने के प्रयास चल रहे हैं।