लखनऊ: उत्तर प्रदेश में इन दिनों गर्मी का प्रकोप चरम पर है और साथ ही बिजली कटौती ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राजधानी लखनऊ में दिन में 4 से 6 घंटे तक बिजली गुल रह रही है, जबकि कानपुर में यह समस्या और भी गंभीर है जहां 5 से 7 घंटे की कटौती आम बात हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालत और खस्ता है।

बिजली की मांग में तेज उछाल

पिछले कुछ दिनों में बिजली की मांग में भारी वृद्धि देखी गई है। 17 मई को जहां मांग 28,900 मेगावाट के आसपास थी, वही 21 मई की रात तक यह बढ़कर 33,000 मेगावाट तक पहुंच गई। यानी मात्र पांच दिनों में करीब 4,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की खपत बढ़ गई। पिछले साल मई महीने में अधिकतम मांग 28,858 मेगावाट ही रही थी।

असली समस्या क्या है – मांग या इंफ्रास्ट्रक्चर?

विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या सिर्फ बढ़ती मांग की नहीं है। यूपी में बिजली पहुंचाने वाला डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम काफी पुराना और कमजोर पड़ गया है। क्षमता से ज्यादा लोड पड़ने के कारण पुराने ट्रांसफार्मर बार-बार खराब हो रहे हैं। तारों की पुरानी स्थिति वोल्टेज फ्लक्चुएशन को संभाल नहीं पा रही है।

नतीजतन, बड़े पैमाने पर तकनीकी खराबियां आ रही हैं और उन्हें ठीक करने में भी काफी देरी हो रही है। संविदा कर्मचारियों की संख्या पहले ही घटाई जा चुकी है और नए कर्मियों की भर्ती नहीं हो पाई है।

BJP विधायक ने ऊर्जा मंत्री को लिखा पत्र

चंदौली जिले के सैयदराजा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक सुशील सिंह ने ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखकर स्थानीय बिजली संकट की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में मात्र 12-13 घंटे ही बिजली मिल पा रही है, जिससे लोग बेहद परेशान हैं।

सरकार पर बढ़ता दबाव

प्रदेश के कई हिस्सों — आगरा, बहराइच, गोंडा, रायबरेली आदि में भी यही स्थिति बनी हुई है। साल दर साल बिजली की खपत बढ़ रही है, लेकिन ट्रांसफार्मर, केबल और अन्य बुनियादी ढांचे को उतनी तेजी से अपग्रेड नहीं किया गया।

ऊर्जा विभाग का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ मांग बढ़ी है और इस पर नजर रखी जा रही है, लेकिन विपक्ष और आम लोग इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की मांग कर रहे हैं।