बॉम्बे हाईकोर्ट ने 12 साल पुराने एक संवेदनशील कस्टोडियल डेथ मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने 8 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का आरोप बरकरार रखा है, जिससे अब इन पर मुकदमा चल सकेगा।
यह मामला 25 वर्षीय युवक एग्नेलो वाल्डारिस की हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि युवक को पुलिस हिरासत में गंभीर यातना दी गई थी। इसलिए मामले में ट्रायल जरूरी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों के निशान
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एग्नेलो के शरीर पर कई जगह चोटों के गहरे निशान मिले थे। कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए पुलिस की सफाई पर सवाल उठाए। जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस श्याम चंदक की बेंच ने टिप्पणी की कि कस्टोडियल मौत के मामलों में सीधे गवाह मिलना मुश्किल होता है, इसलिए परिस्थितिजन्य सबूतों का विशेष महत्व होता है।
घटना क्या थी?
अप्रैल 2014 में वडाला जीआरपी पुलिस ने चेन स्नैचिंग के शक में एग्नेलो समेत चार लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें एक नाबालिग लड़का भी शामिल था। एग्नेलो के पिता लियोनार्ड वाल्डारिस ने खुद पुलिस को अपने बेटे को सौंपा था, क्योंकि पुलिस ने आश्वासन दिया था कि केवल पूछताछ होगी और फिर कोर्ट में पेश किया जाएगा।
लेकिन कुछ ही दिनों बाद परिवार को बेटे की लाश सौंपी गई। परिवार के सदस्यों और उपलब्ध गवाहों के अनुसार, पुलिस ने युवक के साथ बेहद क्रूर व्यवहार किया। उन पर बेल्ट और डंडों से हमला किया गया, नंगा करके पीटा गया, उल्टा लटकाया गया और यौन शोषण भी किया गया। इन यातनाओं के कारण ही उनकी मौत हो गई।
पुलिस पक्ष ने शुरुआत में इन आरोपों से इनकार किया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य सबूतों ने पुलिस की दलीलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
कोर्ट का फैसला
सितंबर 2022 में स्पेशल ट्रायल कोर्ट ने इन 8 पुलिसकर्मियों पर हत्या का आरोप लगाने का आदेश दिया था। अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसी आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने साफ कहा कि युवक की मौत हिरासत में सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई थी।
यह फैसला कस्टोडियल मौत के मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पुलिसकर्मी अब इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।