उत्तर प्रदेश के मेरठ में शास्त्री नगर का सेंट्रल मार्केट सालों से व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन अब अवैध निर्माणों की वजह से यह सुर्खियों में है। प्रशासन ने हाल ही में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है, जिसमें 44 संपत्तियों को सील करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट से मिला है। इनमें 6 अस्पताल, 5 स्कूल और कुछ बैंक भी शामिल हैं।
इस पूरे विवाद की शुरुआत साल 2012 में हुई एक छोटी सी घटना से हुई, जो बाद में बड़े अभियान में बदल गई। आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना की शिकायत पर जब आवास विकास विभाग की टीम भूखंड संख्या 661/6 पर बिना अनुमति बने निर्माण को रोकने पहुंची, तो एक व्यापारी ने अधिकारी को थप्पड़ मार दिया।
इस घटना के बाद लोकेश खुराना ने पूरे मार्केट के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी। जांच में पता चला कि कई जगहों पर आवासीय प्लॉट्स पर बिना मंजूरी के व्यावसायिक निर्माण किए गए थे और दुकानें, संस्थान चलाए जा रहे थे।
खुराना ने इस मुद्दे को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। जैसे-जैसे कोर्ट की जांच आगे बढ़ी, एक के बाद एक अवैध निर्माण सामने आने लगे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि खुद व्यापारी एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें करने लगे।
लोकेश खुराना का मकसद भ्रष्टाचार उजागर करना था, लेकिन इस कार्रवाई में कई व्यापारी और अधिकारी भी फंस गए। अब दशकों पुराना व्यापार ठप पड़ गया है और कई लोग अपनी दुकानों को खुद ही तोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 44 संपत्तियों को सील करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का दूसरी जगह दाखिला कराने और अस्पतालों में भर्ती मरीजों को अगली सुनवाई तक दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने को भी कहा है। हाई कोर्ट ने संबंधित विभागों से 9 अप्रैल तक जवाब मांगा है।
इस आदेश के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। व्यापारी अपनी आजीविका पर संकट मंडराने से नाराज हैं, जबकि विपक्षी नेता सरकार पर हमला बोल रहे हैं। कई लोग इसे लंबे समय से चले आ रहे अनियमितताओं का नतीजा बता रहे हैं।
मेरठ का यह बाजार कभी शहर का 'कनॉट प्लेस' कहा जाता था, लेकिन अब मास्टर प्लान के उल्लंघन और अवैध व्यावसायिक उपयोग की वजह से बड़े संकट में फंस गया है। आगे की सुनवाई में क्या फैसला आता है, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है।