होर्मुज के बाद बाब अल-मंदेब पर नजर: ईरान वैश्विक तेल मार्गों को चोक करने की रणनीति में, संकट गहराने की आशंका
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावित करने के बाद अब बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है। यदि अमेरिका कोई रणनीतिक भूल करता है तो ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को बंद कर सकता है। इससे दुनिया में तेल और गैस की कीमतें भारी बढ़ोतरी कर सकती हैं, जिसका असर भारत समेत हर देश पर पड़ेगा। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिश में जुटा हुआ है। हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर उठाए गए कदमों के बाद अब तेहरान की नजर बाब अल-मंदेब पर है – यह वह जलडमरूमध्य है जो लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है और सूएज नहर के रास्ते यूरोप-एशिया व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ईरानी सैन्य अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी कोई बड़ी गलती करते हैं, तो ईरान अपने समुद्री ऑपरेशंस को इस दूसरे चोक पॉइंट की ओर मोड़ सकता है। बाब अल-मंदेब पहले से ही यमन के हूती विद्रोहियों (जो ईरान समर्थित माने जाते हैं) के प्रभाव में रहा है, जिन्होंने अतीत में इस क्षेत्र में शिपिंग को बाधित किया था।
विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों के एक साथ प्रभावित होने से दुनिया का लगभग 20-30% तेल और काफी मात्रा में एलएनजी ट्रेड प्रभावित हो सकता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला ज्यादातर तेल इन मार्गों से ही गुजरता है। वैकल्पिक रास्ते जैसे अफ्रीका के दक्षिणी छोर से जाना बहुत लंबा और महंगा है, जबकि पाइपलाइन विकल्प सीमित और असुरक्षित हैं।
इससे तेल की कीमतें $100-200 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल, बिजली उत्पादन और औद्योगिक लागत पर पड़ेगा। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति मुश्किलें बढ़ा सकती है।
ईरान का यह कदम अमेरिका-इजरायल के साथ बढ़ते टकराव का हिस्सा लगता है। तेहरान इसे रणनीतिक दबाव के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है ताकि क्षेत्रीय संघर्ष में अपना प्रभाव बनाए रखे। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इन जलमार्गों की सुरक्षा के लिए नए उपाय तलाश रहा है, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।