पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों के विरोध में गिग वर्कर्स का 5 घंटे का राष्ट्रव्यापी बंद
ईंधन की महंगाई और ऐप कंपनियों द्वारा कम भुगतान के खिलाफ गिग वर्कर्स ने शनिवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक हड़ताल की। टैक्सी ड्राइवर और डिलीवरी पार्टनरों ने सरकार व कंपनियों से राहत की मांग की है।
देशभर के गिग वर्कर्स ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और ऐप कंपनियों की कम पेमेंट दरों के खिलाफ आज शनिवार को 5 घंटे की अस्थायी हड़ताल शुरू कर दी है।
गिग और प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने टैक्सी ड्राइवरों और डिलीवरी वर्कर्स से दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक ऐप-आधारित सेवाएं बंद रखने की अपील की है।
हड़ताल का कारण हाल ही में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी। इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। कई शहरों में पेट्रोल 110 रुपये के पार चला गया है।
यूनियन का कहना है कि ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनरों का खर्च बढ़ रहा है, लेकिन ऐप कंपनियां किराए और इंसेंटिव में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं कर रही हैं। इससे उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है।
वर्कर्स की शिकायत एक कैब ड्राइवर मोहम्मद ने बताया कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से उनका रोज का खर्च बढ़ जाता है, लेकिन कमाई नहीं बढ़ती। कमीशन कटौती के बाद घर चलाना मुश्किल हो रहा है। कई अन्य वर्कर्स ने भी कहा कि उनका ज्यादातर समय सड़क पर बीतता है, इसलिए ईंधन की महंगाई सीधे उनकी आय को प्रभावित करती है।
क्या है मांग यूनियन ने सोशल मीडिया पर अपील जारी कर कहा कि यह हड़ताल सरकार और ऐप कंपनियों को संदेश देने के लिए है। अगर जल्दी राहत नहीं मिली तो भविष्य में बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
वैश्विक कारण तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है, जो बढ़ोतरी का मुख्य कारण है।
यह 5 घंटे की हड़ताल गिग इकोनॉमी से जुड़े लाखों वर्कर्स की बढ़ती मुश्किलों को उजागर करती है। हड़ताल का असर आज दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक ओला, उबर, स्विगी, जोमैटो जैसी सेवाओं पर दिख सकता है।