कार्यभार के बोझ से दबे साकेत कोर्ट क्लर्क ने लगा दी छलांग, सुसाइड नोट में खोला राज
नई दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर में 9 जनवरी 2026 को एक क्लर्क ने ऊपरी मंजिल से कूदकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मृतक हरीश सिंह महार 60% दिव्यांग थे और लंबे समय से कार्य संबंधी तनाव झेल रहे थे। घटना से कोर्ट में शोक की लहर।
नई दिल्ली। राजधानी के साकेत जिला न्यायालय परिसर में शुक्रवार 9 जनवरी 2026 को एक हृदयविदारक हादसा हुआ। यहां तैनात एक क्लर्क हरीश सिंह महार ने कोर्ट भवन की सबसे ऊपरी मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जान दे दी। हरीश सिंह महार 60 प्रतिशत दिव्यांग थे और न्यायिक रिकॉर्ड संभालने तथा जजों की सहायता करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करते थे।
घटना उस समय हुई जब कोर्ट में सामान्य कार्य चल रहा था। अचानक ऊपरी मंजिल से छलांग की आवाज सुनकर परिसर में हड़कंप मच गया। सहकर्मी और अन्य स्टाफ तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक हरीश की मौत हो चुकी थी। इस दौरान कुछ देर के लिए न्यायिक कार्यवाही भी स्थगित कर दी गई। पूरे कोर्ट कैंपस में मातम छा गया।
पुलिस ने मौके से एक सुसाइड नोट बरामद किया है, जिसमें हरीश ने खुद को हरीश सिंह महार बताया और लिखा कि वे काफी समय से ऑफिस के भारी कार्यभार और मानसिक दबाव से परेशान थे। उन्होंने अपनी इस निर्णय के लिए स्पष्ट रूप से किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी नहीं ठहराया। नोट में सिर्फ कार्य संबंधी तनाव का उल्लेख है।
दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। सुसाइड नोट को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। साथ ही, हरीश के सहयोगियों से पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में यह कार्यस्थल पर बढ़ते तनाव से जुड़ी घटना प्रतीत हो रही है।
सहकर्मियों का कहना है कि हरीश बेहद मेहनती थे, लेकिन न्यायालयों में स्टाफ पर पड़ने वाला अत्यधिक वर्कलोड उन्हें लगातार परेशान कर रहा था। इस दुखद घटना ने एक बार फिर अदालती कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यभार प्रबंधन की जरूरत पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में काउंसलिंग और बेहतर सपोर्ट सिस्टम की आवश्यकता है।
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा, लेकिन फिलहाल किसी बाहरी साजिश या दबाव के संकेत नहीं मिले हैं। यह घटना कार्यस्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य के बढ़ते संकट को रेखांकित करती है।