दिल्ली: पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर सख्ती में है दरअसल अर्जुन गोपाल नाम के एक व्यक्ति ने 2015 में पटाखों को लेकर याचिका दायर की थी जिसके चलते पटाखों को लेकर कई अहम फैसले लिए गए थे। और सरकार अभी भी पटाखों को लेकर सख्ती दिखा रही है किसी भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा- उत्सव सभी मनाना चाहते हैं लेकिन इस कीमत पर यह सब को तय करना होगा इतना भी कहां है की हम उल्लास के नाम पर किसी भी व्यक्ति को या नागरिक को अधिकारों का उल्लंघन करने की इजाजत नहीं दे सकते साथ ही उन्होंने कहा कि हम जश्न मनाने के खिलाफ नहीं है लेकिन यह दूसरों को हानि पहुंचाने के लिए जश्न नहीं हो सकता। 

 

साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि पटाखों के प्रदूषण से अस्थमा रोगियों और सांस संबंधी रोगियों को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है। गौरतलब है कि जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना ने बृहस्पतिवार को कहा कि पटाखों पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन करने की जरूरत है क्योंकि यह हमारे जीवन के अधिकार के लिए अत्यंत जरूरी है क्योंकि हर कोई व्यक्ति जानता है कि पटाखों के प्रदूषण से दिल्ली में लोग किस कदर बीमार है और कोई भी उत्सव किसी की जान को खतरे में डालकर नहीं हो सकता साथ ही यह दौर भी कोरोना का चल रहा है ऐसी बीमारियों को देखते हुए पटाखों पर प्रतिबंध आवश्यक है वरना यह एक गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है। 

 

यह फैसला वायु प्रदूषण के चलते उत्पादन बिक्री पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनाया गया था जिस के बीच में नहीं आ रहे हैं लेकिन अधिकारों का इस तरह उल्लंघन भी नहीं होने दे सकते हैं हम सख्त संदेश देना चाहते हैं कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए हम जहां हैं और हम आदेशों का पूरी तरह पालन चाहते हैं साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस देश की मुख्य समस्या आदेश को लागू न करना है।