उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के मुकुंदपुर गांव में इंसान और पशु के बीच गहरे लगाव की एक भावुक मिसाल सामने आई है। 24 साल तक परिवार के साथ रहने वाली गाय ‘गोरी’ के निधन पर उसे इंसानों जैसी सम्मानजनक विदाई दी गई।
गांव के देवेंद्र शर्मा परिवार के लिए गोरी सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि घर की एक सदस्य और मां के समान थी। परिवार के मुखिया देवेंद्र शर्मा और उनके बेटे अमित शर्मा ने बताया कि गोरी पिछले 24 वर्षों से उनके आंगन में थी। उसने अपने जीवन में लगभग डेढ़ दर्जन बछड़ों को जन्म दिया, जिनका वंश आज आसपास के कई गांवों में फैला हुआ है।
सबसे खास बात यह है कि गोरी के दूध से परिवार की तीन पीढ़ियां बड़ी हुईं — बच्चों से लेकर नाती-पोतों तक सबने उसका दूध पिया। परिवार के सदस्यों का कहना है कि गोरी ने सिर्फ दूध नहीं दिया, बल्कि मां जैसा स्नेह और सुरक्षा का भाव भी प्रदान किया। उसके जाने से पूरा घर सूना हो गया है।
मंगलवार को गोरी के निधन के बाद परिवार ने उसे अंतिम विदाई देने का फैसला लिया। गोरी की अर्थी को फूलों, गुब्बारों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया गया। फिर ढोल-नगाड़ों और बैंड की धुन पर शोभायात्रा निकाली गई। गांव वालों ने जगह-जगह फूल बरसाकर गोरी को श्रद्धांजलि अर्पित की। सैकड़ों लोग नम आंखों से इस अनोखी यात्रा में शामिल हुए।
परिवार ने बताया कि गोरी की तेरहवीं भी पूरे हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार आयोजित की जाएगी। हालांकि तारीख अभी तय नहीं हुई है।
यह घटना ग्रामीण भारत में पशुओं के प्रति लोगों के गहरे प्रेम और संवेदनशीलता को दर्शाती है। आजकल जब इंसान-पशु संबंध कमजोर हो रहे हैं, तब मुकुंदपुर की यह कहानी दिल छू लेने वाली है।
देवेंद्र शर्मा परिवार इस दुख की घड़ी में भी इस बात से संतुष्ट है कि गोरी का वंश आज भी उनके आसपास जीवित है और परिवार की सेवा करती रहेगी।
ऐसी कहानियां याद दिलाती हैं कि पशु भी परिवार का अभिन्न अंग हो सकते हैं और उनके प्रति कृतज्ञता दिखाना हमारा नैतिक कर्तव्य है।