उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक बार फिर पंचायत द्वारा कानून को दरकिनार कर सजा देने का मामला सामने आया है। देहात कोतवाली क्षेत्र के कोलकी राघड़ गांव में हुई इस घटना ने स्थानीय स्तर पर सनसनी फैला दी है।
गांव के प्रधान रजत राणा पर आरोप है कि उन्होंने पंचायत बुलाकर तीन युवकों — मुकीम, साहिल और सलमान — को नाबालिग लड़कियों को भगाने के शक में सजा दी। आरोपियों का सिर मुंडवाया गया और फिर भरी पंचायत में जूतों से उनकी पिटाई कराई गई। इस दौरान शमीम नाम के एक अन्य व्यक्ति पर भी मारपीट करने की शिकायत सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, मुस्लिम समाज की दो नाबालिग बहनों के साथ संबंधित विवाद में यह सजा दी गई। युवती पक्ष ने इन युवकों पर लड़कियों को फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाया। हालांकि, पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपित युवक उस समय अपने घर पर ही मौजूद थे।
वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई। सहारनपुर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि गांव में किसी भी रूप में कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना उस समय हुई जब पुलिस पहले से ही लड़कियों के मामले की जांच कर रही थी। फिर भी पंचायत ने अपनी मर्जी से फैसला सुनाकर युवकों का सार्वजनिक अपमान किया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कृत्य न सिर्फ कानूनी उल्लंघन हैं बल्कि मानवाधिकारों का भी हनन करते हैं।
पुलिस ने सभी आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और वीडियो फुटेज के आधार पर सबूत जुटाए जा रहे हैं। गांव प्रधान समेत अन्य शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
ऐसी घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों द्वारा व्यक्तिगत न्याय व्यवस्था चलाने की प्रवृत्ति को उजागर करती हैं, जो संविधान और कानून के विरुद्ध है। उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस विभाग ने ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई हुई है।
पुलिस ने अपील की है कि किसी भी विवाद में खुद सजा देने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाया जाए। जांच अभी जारी है और आगे की अपडेट के अनुसार दोषियों पर उचित कार्रवाई होगी।