गजब का फैसला! 1 मिनट में 25 शब्द टाइप नहीं कर सके 3 क्लर्क, कानपुर DM ने बना दिया चपरासी
कानपुर कलेक्ट्रेट में टाइपिंग स्पीड की बुनियादी योग्यता पूरी न करने पर तीन जूनियर क्लर्कों को डिमोट कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) बना दिया गया। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के आदेश पर यह कार्रवाई हुई। बार-बार मौका देने के बावजूद सुधार न होने पर सख्त कदम उठाया गया।
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में सरकारी दफ्तरों में कार्यक्षमता और योग्यता को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने एक अनोखा और चर्चित फैसला लिया है, जिसमें कलेक्ट्रेट के तीन कनिष्ठ लिपिकों को उनके पद से हटाकर चपरासी बना दिया गया।
प्रेमनाथ यादव (डीएम कैंप ऑफिस), नेहा श्रीवास्तव और अमित कुमार यादव (कलेक्ट्रेट) मृतक आश्रित कोटे के तहत जूनियर क्लर्क के पद पर नियुक्त हुए थे। नियम के अनुसार इन्हें नियुक्ति के एक साल के अंदर टाइपिंग टेस्ट पास करना था, जिसमें कम से कम 25 शब्द प्रति मिनट की स्पीड जरूरी थी।
पहले टेस्ट में फेल होने पर प्रशासन ने रियायत देते हुए इनकी वार्षिक वेतन वृद्धि रोक दी और सुधार का एक और मौका दिया। 2025 में दोबारा हुए टेस्ट में भी ये तीनों कर्मचारी निर्धारित स्पीड हासिल नहीं कर पाए। लगातार दो बार असफलता के बाद जिलाधिकारी ने पूरे मामले की समीक्षा कराई और अंत में कड़ा फैसला लिया।
अब ये तीनों कर्मचारी लिपिक के बजाय चतुर्थ श्रेणी के पद पर अपनी सेवाएं देंगे। एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि सेवा नियमों में टाइपिंग टेस्ट पास करना अनिवार्य है। कई अवसर देने के बावजूद कोई सुधार न दिखने पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
इस फैसले से पूरे कलेक्ट्रेट में चर्चा का माहौल है। प्रशासन ने साफ संदेश दे दिया है कि सरकारी नौकरी में बुनियादी योग्यता पूरी न करने वालों को कोई छूट नहीं मिलेगी। अन्य कर्मचारियों में भी अब कार्यक्षमता को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।
यह घटना सरकारी विभागों में दक्षता, जवाबदेही और योग्यता परीक्षण की अहमियत को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदम भविष्य में अन्य विभागों के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं।
पुलिस और प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि सरकारी कामकाज में सुधार के लिए जागरूक रहें। जांच अभी जारी है और आगे की अपडेट के अनुसार कोई नया विकास हो तो सूचित किया जाएगा।