नोएडा में असुरक्षित और बिना बैरिकेडिंग वाले निर्माण गड्ढों की समस्या एक बार फिर जानलेवा साबित हुई है। 8 अप्रैल 2026 को सेक्टर-94 में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें अमिटी यूनिवर्सिटी के अंतिम वर्ष के छात्र हर्षित भट्ट की मौत हो गई।
हर्षित भट्ट (23 वर्ष), इंदिरापुरम गाजियाबाद निवासी, अपनी फाइनल परीक्षा समाप्त होने के बाद तीन-चार दोस्तों के साथ सेलिब्रेशन करने के लिए सुपरनोवा सोसायटी के पास स्थित एक खाली प्लॉट पर पहुंचे थे। वहां पानी से भरा एक गहरा गड्ढा था, जिसमें बारिश का पानी जमा हो गया था।
पुलिस के अनुसार, हर्षित नहाने के इरादे से पानी में उतरा, लेकिन अचानक गहरे हिस्से में चला गया और डूबने लगा। उसके दोस्तों ने तुरंत बचाने की कोशिश की और खुद भी पानी में कूद पड़े। डायल-112 पर सूचना मिलते ही सेक्टर-126 पुलिस टीम और प्राइवेट गोताखोर मौके पर पहुंचे। तीन अन्य छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन हर्षित को अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
यह घटना नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के पास हुई, जहां कुछ महीने पहले भी एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल की कार गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों और छात्रों में इस घटना से काफी आक्रोश है। कई बार शिकायतें होने के बावजूद निर्माण स्थलों पर गड्ढों को ढकने या बैरिकेडिंग करने में लापरवाही बरती जा रही है।
अमिटी यूनिवर्सिटी ने हर्षित की मौत पर शोक व्यक्त किया है। पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। नोएडा अथॉरिटी से पूछा जा रहा है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा उपाय क्यों नहीं किए गए।
ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जा रही हैं, जिससे नोएडा में ‘डेथ पिट्स’ की चर्चा आम हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि विकास कार्यों के दौरान खोदे गए गड्ढों को तुरंत सुरक्षित करना जरूरी है, वरना निर्दोष जवान जानें लगातार खतरे में रहेंगी।
पुलिस और प्रशासन से अपील की जा रही है कि सभी खुल्ले गड्ढों की तुरंत जांच कर उन्हें सुरक्षित बनाया जाए और दोषी ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।